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Kavita

जब चाँद का धीरज छूट गया । वह रघुनन्दन से रूठ गया । बोला रात को आलोकित हम ही ने करा है । स्वयं शिव ने हमें अपने सिर पे धरा है । तुमने भी तो उपयोग किया हमारा है । हमारी ही चांदनी मे...

*अब मैं..*

*अब मैं..* तजुर्बे के मुताबिक़ खुद को ढाल लेता हूं! कोई प्यार जताए तो जेब संभाल लेता हूं!! वक़्त था सांप की परछाई डरा देती थी! अब एक आध मै आस्तीन में भी पाल लेता हूं!! मुझे फासने की कह...