आज का मेरा अनुभव बहुत ही सुखद और दिल को छू लेने वाला रहा। आज मुझे एक बहुत अच्छी बात महसूस हुई कि बिना किसी अपेक्षा के दो लोगों ने मुझे फल लाकर दिए। सुबह मेरे मॉर्निंग क्लब के एक सदस्य ने मुझे ताज़ी शहतूत (mulberries) दीं, जो सच में बहुत स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक थीं। फिर थोड़ी देर पहले मेरे एक रिश्तेदार ने बेल का फल लाकर दिया, जो गर्मियों में बहुत लाभकारी होता है। इन छोटी-छोटी बातों ने मेरे दिल को बहुत खुश कर दिया। सच में, मैं उनके इस प्यार और स्नेह के लिए बहुत आभारी (grateful) हूँ। आज का दिन मुझे यह सिखा गया कि सच्ची खुशी अक्सर ऐसी ही छोटी-छोटी अनमोल बातों में छुपी होती है।
"आजकल के डिजिटल समूहों में, जब बड़े-बुजुर्ग 'गुड मॉर्निंग' जैसे संदेश भेजते हैं, तो अक्सर उन्हें मना किया जाता है। पर क्या यह सचमुच कोई बुरी बात है? उनकी ज़िंदगी के अनुभवों, उनके विचारों को सुनने वाला उनके पास कोई नहीं होता। ऐसे में, जब वे अपनी बातें समूह में साझा करते हैं, तो इसमें हर्ज ही क्या है? यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि उनके अकेलेपन को दूर करने और समाज से जुड़े रहने का एक छोटा सा प्रयास होता है। हमें उनके इस प्रयास को समझना चाहिए और उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए, क्योंकि उनके पास ज्ञान और अनुभव का खजाना है जो अक्सर अनसुना रह जाता है।"