सुबह की ठंडी हवाओं में, जब कदम बाहर निकलते हैं, हल्की-सी धूप के संग, मन भी खिल-से उठते हैं। पार्क की उन शांत राहों में, सुकून सा मिल जाता है, कसरत के मीठे पल में, जीवन मुस्कुराता है। पर जैसे ही दिन चढ़ता है, सूरज आग बरसाता है, दिल्ली की तपती गर्मी में, तन-मन थक सा जाता है। घर की चार दीवारों में, दुनिया सिमट सी जाती है, मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर में ही घड़ी निकल जाती है। रसोई की गर्मी में, खाना बनाना भी एक जंग है, खाने के बाद तो बस, आराम ही उमंग है। नींद की मीठी बाहों में, दिन यूँ ही ढल जाता है, कुछ करने का मन भी, जाने कहाँ खो जाता है। बस सुबह का वो सुकून, दिल को सबसे प्यारा लगता है, बाकी सारा दिन तो, यूँ ही बीत सा जाता है… 🌿☀️
आज का मेरा अनुभव बहुत ही सुखद और दिल को छू लेने वाला रहा। आज मुझे एक बहुत अच्छी बात महसूस हुई कि बिना किसी अपेक्षा के दो लोगों ने मुझे फल लाकर दिए। सुबह मेरे मॉर्निंग क्लब के एक सदस्य ने मुझे ताज़ी शहतूत (mulberries) दीं, जो सच में बहुत स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक थीं। फिर थोड़ी देर पहले मेरे एक रिश्तेदार ने बेल का फल लाकर दिया, जो गर्मियों में बहुत लाभकारी होता है। इन छोटी-छोटी बातों ने मेरे दिल को बहुत खुश कर दिया। सच में, मैं उनके इस प्यार और स्नेह के लिए बहुत आभारी (grateful) हूँ। आज का दिन मुझे यह सिखा गया कि सच्ची खुशी अक्सर ऐसी ही छोटी-छोटी अनमोल बातों में छुपी होती है।