सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अनुभवों का सागर: जब बुजुर्ग साझा करें अपनी बातें

 "आजकल के डिजिटल समूहों में, जब बड़े-बुजुर्ग 'गुड मॉर्निंग' जैसे संदेश भेजते हैं, तो अक्सर उन्हें मना किया जाता है।

पर क्या यह सचमुच कोई बुरी बात है? उनकी ज़िंदगी के अनुभवों, उनके विचारों को सुनने वाला उनके पास कोई नहीं होता। ऐसे में, जब वे अपनी बातें समूह में साझा करते हैं, तो इसमें हर्ज ही क्या है?

यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि उनके अकेलेपन को दूर करने और समाज से जुड़े रहने का एक छोटा सा प्रयास होता है।

हमें उनके इस प्रयास को समझना चाहिए और उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए, क्योंकि उनके पास ज्ञान और अनुभव का खजाना है जो अक्सर अनसुना रह जाता है।"

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Nature: The Key to Good Health and Happiness 🌿

 I am a nature lover, and I truly believe that staying close to nature is very important for a healthy life. Greenery, fresh air, and pleasant weather have a soothing effect on both the body and mind.  Especially in a city like Delhi, where the summer heat can become extremely intense, spending time in parks or green surroundings brings a sense of relief and freshness. Nature helps reduce stress, improves our mood, and fills us with positive energy. When we stay close to nature, our health improves, and both our body and mind feel happy, calm, and refreshed.

“आई थी बिटिया, छोड़ गई खुशबू”

  कविता आज बहुत दिनों बाद मेरी बेटी घर आई, अपनी नन्ही परी को संग लिए खुशियों की रौशनी छा गई। समझ न आया क्या खिलाऊँ, कहाँ बिठाऊँ उस लाड़ली को, आँखों में बसती मुस्कान उसकी भर गई मन की हर खाली कोठरी को। कुछ बातें मैंने कीं, कुछ सवाल उसने पूछे, हँसी, यादें, अपनापन सब लम्हों में घुलते चले गए। पल भर में समय फिसल गया, वो आई… और चली भी गई, आँगन सूना रह गया फिर पर दिल में मिठास छोड़ गई।