कैसे भुला सकुंगी मैं उन यादो को, उन ख्वाबो को, ना खत्म होने वाली उन बातो को। बड़ी तमन्ना के बाद मिली नौकरी एक जगह थी बिरलाग्राम , नागदा बनी कोएड स्कूल मे पीजीटी, साथ मिला फर्निश्ड क्वार्टर। छोटी उम्र मे बड़ी पदवी पाकर, हो गई मैं तो धन्य। प्यार मिला सम्मान मिला, उठते बैठते सलाम मिला। ना परेशानी किसी बात की, ना तनाव किसी गम का, हसीं ख़ुशी के वातावरण मैं, दिन गुजरे पंख लगाके..... और फिर - समय ने करवट बदला.... देखते देखते धूमिल हुई हसींन यादें।
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