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सृमद्धि जन्म सिद्ध अधिकार है-

 प्रकृति मे जो भी चीज़े है वो सुन्दर लगते है। बहती नदी ,झरना ,नाचता हुआ मोर पर भी ये लागु होता है। 

दुनिया मे हम सब एक मकसद से आते है। मकसद पाकर सृमद्धि के शिखर को छू सकते है या मकसद से भटक जाते है। मनुष्य की प्रतिभा ही मकसद तक पहुँचाती है। ये प्रतिभा मनुष्य मे छिपी रहती है। ये बेसिक प्रतिभा आप को कोई दे नहीं सकता है और न ही कोई छीन सकता है। माता पिता का काम है इस प्रतिभा को पहचानना और बाहर निकालना। 

जिस चीज़ को करने मे मज़ा आता है और वो करने मे समय का पता नहीं चलता है ,उसमे आनंद आता है वही उसकी प्रतिभा है। वही उसके जीवन का मकसद है। 

कोई मनुष्य आता है संगीत की प्रतिभा लेकर और घर वाले उसे बना देते है कुछ और । 

असंतोष इस बात का सबूत है की आप अपने क्षेत्र मे नहीं है। 

आप कर्म मे डूब जाये तो वही प्रतिभा है। 

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