यूँ ही ख्यालों में डूबी थी आज कि अचानक एक संदेश आया।
आँखें नम हो गईं ये जानकर कि मैंने भी कुछ अनमोल कमाया।
फिक्रमंद है कोई, ये सोच कर दिल भर आया।
और इसलिए ये सब बयां करने का मैंने मन बनाया।
ना खून का कोई रिश्ता, ना भाग्य का कोई बंधन।
जीवन की इस राह में, फिर भी तुमसे मिला वो अपनापन।
हमउम्र नहीं थे सब, कुछ वो निश्छल स्नेह ही था कि हमारे दिल के तार तुमसे जुड़े।
जब-जब छलके आँसू, तब-तब तुम्हें अपने पास पाया।
'तुम ठीक हो' इन शब्दों ने मेरे हर गम को भुलाया।
हँसते-हँसाते, नाचते-गाते, मुझे हर पल जीना सिखाते ।
पता नहीं ऐ दोस्तों, वक्त कब गुज़र गया तुम्हारे साथ चलते-चलते।
कुछ रिश्तों में दोस्त मिले तो कुछ दोस्तों से रिश्ते बने ।
शुक्रगुज़ार है दिल सभी का, जो आप मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा बने।
हर साथी से जुड़ी है, कुछ बेहद खास यादें। सलामत रहे दोस्ती हमारी, कभी न टूटे प्रेम के ये धागे।
तुम दूर हो या पास, हम हरदम साथ निभाएँगे।
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