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सोच मे है भविष्य

 एक बार फिर  -

कोरोना के बिगड़े हालत को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर लॉक डाउन लगाया है। 

आज की युवा पीड़ी चिंतातुर है।  प्रगति मे फिर आया रुकावट........

यही नहीं हर एक देश का बच्चा भी कुछ सोचने लग गया है। 

इधर लॉक डाउन लगा नहीं की स्कूल  मे समर वेकेशन की घोषणा कर दी गई है। बच्चो को घर मे व्यस्त रखने का एक ऑनलाइन क्लास थी वो भी बंद कर दिया गया है। 

आप ही बताइये ऑनलाइन क्लास मे समर वेकेशन की क्या ज़रूरत थी?

देश का हर नागरिक भय,चिंता और सोचने पर मजबूर हो गया है। 

आज बहुत सारे सवाल हमारे मन मस्तिष्क मे चल रहे है। हालत कब सामान्य होगी?

इधर मजदूरों का अपने गांव की तरफ पलायन उनमे असुरक्षा की भावना को जन्म दे चुका है। 

देश की आर्थिक व्यस्था को पटरी पर किस तरह से लाया जाये?

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