सुबह की ठंडी हवाओं में, जब कदम बाहर निकलते हैं,
हल्की-सी धूप के संग, मन भी खिल-से उठते हैं।
पार्क की उन शांत राहों में, सुकून सा मिल जाता है,
कसरत के मीठे पल में, जीवन मुस्कुराता है।
पर जैसे ही दिन चढ़ता है, सूरज आग बरसाता है,
दिल्ली की तपती गर्मी में, तन-मन थक सा जाता है।
घर की चार दीवारों में, दुनिया सिमट सी जाती है,
मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर में ही घड़ी निकल जाती है।
रसोई की गर्मी में, खाना बनाना भी एक जंग है,
खाने के बाद तो बस, आराम ही उमंग है।
नींद की मीठी बाहों में, दिन यूँ ही ढल जाता है,
कुछ करने का मन भी, जाने कहाँ खो जाता है।
बस सुबह का वो सुकून, दिल को सबसे प्यारा लगता है,
बाकी सारा दिन तो, यूँ ही बीत सा जाता है… 🌿☀️
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