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Boosting you

Take risks in your life. 

If you win , you can lead!  

If you loose,  you can guide! 

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प्रकृति ने भी क्या अजीब खेल खेला -

 प्रकृति ने भी क्या अजीब खेल खेला - जो न देते थे जवाब उनके सलाम आने लगे... वक्त बदला तो मेरे नीम पर आम आने लगे.... यह सिर्फ कहने के लिए ही नहीं है। कोविद के समय वातावरण और पेड़ पोधो मे बदलाव देखने को मिला। मेरे बालकनी गार्डन के गमले मे आम के पौधे मे दिसंबर की कड़ाके की ठण्ड मे आम निकलते हुए देख कर आश्चर्य मे पड़ गई। प्रकृति ने भी क्या नया रूप दिखाया।  वाह

“आई थी बिटिया, छोड़ गई खुशबू”

  कविता आज बहुत दिनों बाद मेरी बेटी घर आई, अपनी नन्ही परी को संग लिए खुशियों की रौशनी छा गई। समझ न आया क्या खिलाऊँ, कहाँ बिठाऊँ उस लाड़ली को, आँखों में बसती मुस्कान उसकी भर गई मन की हर खाली कोठरी को। कुछ बातें मैंने कीं, कुछ सवाल उसने पूछे, हँसी, यादें, अपनापन सब लम्हों में घुलते चले गए। पल भर में समय फिसल गया, वो आई… और चली भी गई, आँगन सूना रह गया फिर पर दिल में मिठास छोड़ गई।

ज़िंदगी की सीख

  ज़िंदगी का हर अनुभव कुछ न कुछ सिखा जाता है, कभी मुस्कान देकर, तो कभी आँसू चुपचाप गिरा जाता है। अकेलापन जब साथ निभाता है, तब इंसान खुद को पहचान पाता है। जो कमज़ोरी कभी डर बन जाती थी, वही ताक़त बनकर राह दिखा जाती है। सीखा मैंने— कमज़ोरी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना, हालात चाहे जैसे भी हों, खुद पर भरोसा कभी कम नहीं होने देना। एक बार अगर मन ने ठान लिया, तो किसी सहारे की ज़रूरत नहीं रहती। इंसान इतना मज़बूत बन जाता है, कि दूसरों की बातें असर ही नहीं करतीं। अब जान लिया है मैंने— ताक़त बाहर नहीं, भीतर ही बसती है, और जो खुद से जीत जाता है, उसी की ज़िंदगी सच में सँवरती है।