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Boosting you

Take risks in your life. 

If you win , you can lead!  

If you loose,  you can guide! 

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अनुभवों का सागर: जब बुजुर्ग साझा करें अपनी बातें

  "आजकल के डिजिटल समूहों में, जब बड़े-बुजुर्ग 'गुड मॉर्निंग' जैसे संदेश भेजते हैं, तो अक्सर उन्हें मना किया जाता है। पर क्या यह सचमुच कोई बुरी बात है? उनकी ज़िंदगी के अनुभवों, उनके विचारों को सुनने वाला उनके पास कोई नहीं होता। ऐसे में, जब वे अपनी बातें समूह में साझा करते हैं, तो इसमें हर्ज ही क्या है? यह केवल एक संदेश नहीं, बल्कि उनके अकेलेपन को दूर करने और समाज से जुड़े रहने का एक छोटा सा प्रयास होता है। हमें उनके इस प्रयास को समझना चाहिए और उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए, क्योंकि उनके पास ज्ञान और अनुभव का खजाना है जो अक्सर अनसुना रह जाता है।"

“आई थी बिटिया, छोड़ गई खुशबू”

  कविता आज बहुत दिनों बाद मेरी बेटी घर आई, अपनी नन्ही परी को संग लिए खुशियों की रौशनी छा गई। समझ न आया क्या खिलाऊँ, कहाँ बिठाऊँ उस लाड़ली को, आँखों में बसती मुस्कान उसकी भर गई मन की हर खाली कोठरी को। कुछ बातें मैंने कीं, कुछ सवाल उसने पूछे, हँसी, यादें, अपनापन सब लम्हों में घुलते चले गए। पल भर में समय फिसल गया, वो आई… और चली भी गई, आँगन सूना रह गया फिर पर दिल में मिठास छोड़ गई।

प्रकृति ने भी क्या अजीब खेल खेला -

 प्रकृति ने भी क्या अजीब खेल खेला - जो न देते थे जवाब उनके सलाम आने लगे... वक्त बदला तो मेरे नीम पर आम आने लगे.... यह सिर्फ कहने के लिए ही नहीं है। कोविद के समय वातावरण और पेड़ पोधो मे बदलाव देखने को मिला। मेरे बालकनी गार्डन के गमले मे आम के पौधे मे दिसंबर की कड़ाके की ठण्ड मे आम निकलते हुए देख कर आश्चर्य मे पड़ गई। प्रकृति ने भी क्या नया रूप दिखाया।  वाह