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हम क्या सोचते है -

हमारा चरित्र हमारे विचारो का दर्पण है। विचारो की शक्ति महान है। मनुष्य स्वयं का निर्माता है। विचारो का मुल कर्म है। हम अच्छे बुरे इंसान अपने विचारो से बनते है। हम अपने भाग्य के रचयिता खुद है। आत्मविश्लेषण और अनुभव से हम बेहतर इंसान बन सकते है। परिस्थितिया विचारो से उत्पन्न होती है। बुरी परिस्थिति के बारे मे हम सोच सोच कर खराब परिस्थिति हम खुद निर्माण कर देते है। दृण निश्चय से हम परिस्थिति बदल सकते है।

 आलसी होने के कारण हम असफल होते है। कटु विचार को निकल दे। अच्छे विचार और कर्म कभी भी बुरे परिणाम नहीं देगा। जब हम शिकायत करना बंद कर देते है तो ये विचार हमारी आदत मे बदल जाती है। आलसी विचार गरीबी का रूप ले लेती है। हम अपने विचारो को चुन सकते है।

 नकारात्मक विचारो को त्यागने से संपूर्ण ब्रह्माण्ड हमारी सहायता करने लगता है। 

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