आज का भारतीय मुसलमान
अतीत का कायर हिंदू था और
आज का कायर हिंदू भविष्य का मुसलमान होगा ।
कड़वी बात !
बस कुछ ही साल पहले तक दुर्गा पूजा बंगाल का मुख्य त्योहार था और आज मुहर्रम हो गया ।
सोते रहो और मोदी को कोसते रहो ।
इतिहास गवाह है,
हिन्दू ने कभी हिन्दू का साथ नहीं दिया, तो बेचारा मोदी अकेले क्या करेगा ?
क्या कारण था मोहम्मद गोरी से अकेले पृथ्वीराज चौहान ने ही युद्ध किया, बाकी पड़ोसी हिन्दू राजा क्या कर रहे थे ?
क्या कारण था अकबर से केवल मेवाड़ के महाराणा प्रताप लोहा ले रहे थे बाकी पूरे भारत के राजा कहाँ थे ?
क्या कारण था महाराष्ट्र के शिवाजी महाराज अकेले अफजल खां और ओरगंजेब से युद्ध लड रहे थे, बाकी के हिन्दू राजा कहां थे ?
जब हिंदुओं की आपसी फूट और घमंड ने इन शूरवीर राजाओं को कभी एकमत और एक साथ नहीं होने दिया तो बेचारे अकेला मोदी क्या कर लेगा । सभी देशद्रोही मिलकर इसे भी गिरा ही देंगे ।
हमारा देश सैकड़ों-हज़ारों साल से विदेशी आक्रमणों को झेल रहा है ।
कभी हम सनातनी (हिंदु) पूरे विश्व पर फैले थे ।
आज इसी आपसी फूट के कारण भारत में भी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं ।
ये आखिरी मौका है, फिर नरेन्द्र मोदी जैसा कोई हिंदुवादी शासक नहीं मिलेगा ।
मन की हल्दीघाटी में, राणा के भाले डोले हैं ।
यूँ लगता है चीख-चीख कर,
वीर शिवाजी बोले हैं ।
पुरखों का बलिदान, घास की
रोटी भी शर्मिंदा है ।
कटी जंग में सांगा की, बोटी-2 शर्मिंदा है ।
खुद अपनी पहचान मिटा दी,
कायर भूखे पेटों ने ।
टोपी जालीदार पहन ली,
हिंदुओं के बेटों ने ।
सिर पर लानत वाली छत से,
खुला ठिकाना अच्छा था ।
टोपी गोल पहनने से तो,
फिर मर जाना अच्छा था ।
मथुरा,अवधपुरी घायल है,
काशी घिरी कराहों से ।
यदुकुल गठबंधन कर बैठा,
कातिल नादिरशाहों से ।
कुछ वोटों की खातिर लज्जा,
आई नहीं निठल्लों को ।
कड़ा-कलावा और जनेऊ,
बेच दिया कठमुल्लों को ।
मुख से आह तलक न निकली,
धर्म ध्वजा के फटने पर ।
कब तुमने आंसू छलकाए,
गौ माता के कटने पर ।
लगता है आज़म की, मन्नत पूरी होने वाली है ।
हर हिन्दू की इस भारत में,
सुन्नत होने वाली है ।
जागे नहीं अगर हम तो ये,
प्रश्न पीढियां पूछेंगी ?
गन पकडे बेटे, बुर्के से लदी बेटियाँ पूछेंगी ।
बोलेंगी हे आर्यपुत्र, अंतिम उद्धार किया होता ।
खतना करवाने से पहले हमको मार दिया होता ।
सोते रहो सनातन वालों, तुम सत्ता की गोदी में ।
साँस आखिरी तक भगवा की,
रक्षा हेतु लडूंगा मैं ।
शीश कलम करवा लूँगा पर, कलमा नही पढूंगा मैं ।
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